अध्याय 2 — सांख्य योग

अर्जुन की विषाद-युक्त चित्त को श्रीकृष्ण का प्रथम उपदेश — कर्म, आत्मा और स्थितप्रज्ञता का ज्ञान।

ॐ असतो मा सद्गमयतमसो मा ज्योतिर्गमयसत्यमेव जयतेवासुधैव कुटुम्बकम्कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचनसर्वे भवन्तु सुखिनःसर्वे सन्तु निरामयाः

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