अध्याय 1 — जीवन के मूलभूत सूत्र
विद्या, धन, शत्रु और सुख के विषय में चाणक्य के आरम्भिक नीति-सूत्र।
ॐ असतो मा सद्गमयतमसो मा ज्योतिर्गमयसत्यमेव जयतेवासुधैव कुटुम्बकम्कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचनसर्वे भवन्तु सुखिनःसर्वे सन्तु निरामयाः
विद्या, धन, शत्रु और सुख के विषय में चाणक्य के आरम्भिक नीति-सूत्र।