चाणक्य नीति • अध्याय 1 • श्लोक 3

चाणक्य नीति अध्याय 1 श्लोक 3

सुखस्य मूलं धर्मः। धर्मस्य मूलमर्थः।

सरल हिंदी अर्थ

सुख की जड़ धर्म (सही आचरण) है, और धर्म की जड़ अर्थ (संसाधन) है।

जीवन में इसका अर्थ

सच्ची खुशी के लिए पहले सही आचरण, और उसके लिए आर्थिक स्वावलंबन आवश्यक है — धन कमाना बुरा नहीं, बल्कि धर्मपूर्ण जीवन का आधार है।

ॐ असतो मा सद्गमयतमसो मा ज्योतिर्गमयसत्यमेव जयतेवासुधैव कुटुम्बकम्कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचनसर्वे भवन्तु सुखिनःसर्वे सन्तु निरामयाः

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